संदेश

सहजीविता लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सहजीविता

 सहजीविता  -------------- तुम जंगल यूँ पचा नहीं सकते गमले तुम्हें बचा नहीं सकते, जीना है तो कृतज्ञ रहो प्रकृति को यूँ नचा नहीं सकते। गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... ये नदी-समंदर,पर्वत-झरने मिटे कहीं गर, लगोगे मरने  प्रकृति के इस साहचर्य को समझो  खुद से ब्याह रचा नहीं सकते।  गमले तुम्हें बचा नहीं सकते...  ये अपनी हठधर्मी छोड़ो  ये खुदग़र्ज़ी बेशर्मी छोड़ो  टूट जाओगे एक दिन मानव  खुद को गर लचा नहीं सकते। गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... लूट रहें जो पर्वत-झरने  अपनी झोली को बस भरने  अरे टूटें उनके शीश महल! क्या इतना शोर मचा नहीं सकते? गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... अपनी हद में रहना सीखो जंगल से मत लड़ना सीखो  ये खूँटे के भैंस नहीं  शेर हैं इन्हें परचा नहीं सकते। गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... गर मैं टूटा तुम भी टूटोगे  गर मैं उजड़ा तुम भी उजड़ोगे। जितनी साँसें तुमको दी हैं  उससे अधिक खरचा नहीं सकते। गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... *#अरावलीबचाओ* ✊🏾🌱 *#हसदेवबचाओ*