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दिसंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गरीब आदिवासी परिवार की बेटी बनी अधिकारी

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गरीब आदिवासी परिवार की बेटी बनी अधिकारी कुमारी प्रियंका कश्यप का भूवैज्ञानिक अधिकारी के पद पर हुआ चयन। UPSC के माध्यम से होने वाली G.S.I (जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की परीक्षा को अपने पहले प्रयास में ही पास करके बनी अपने परिवार, गांव और अपने आदिवासी समाज का गौरव। कुमारी प्रियंका कश्यप ग्राम पंचायत बिरिंगपाल, कुच्चा पारा,पोस्ट-पंडरीपानी,तहसील-जगदलपुर,जिला-बस्तर,छत्तीसगढ में रहने वाले आदिवासी माड़िया जनजाति के घासी कश्यप और श्रीमती लक्ष्मी कश्यप की सुपुत्री है। प्रियंका शुरू से होनहार स्टूडेंट रही है। कक्षा आठवीं तक ममता विद्यालय भड़िसगांव से पढ़कर निकली प्रियंका ने आगे की पढ़ाई शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालय पंडरीपानी से किया और दसवीं बोर्ड में 70% और बारहवीं बोर्ड की परीक्षा 74% से उत्तीर्ण किया। प्रियंका ने काॅलेज में भी अपनी योग्यता को जारी रखते हुए बी.एस.सी में 64% और एम.एस.सी में 79% मार्क्स लाए। फिर प्रियंका ने कोई भी महंगी कोचिंग क्लास न ज्वाइन करते हुए अपने घर में रहकर ही UPSC की तैयारी करती रही। गरीबी में रहकर भी कैसे बड़ी उपलब्धी हासिल की जा सकती है, इसके लिए प्रियंका सभी ...

‘पार्कर सोलर प्रोब’

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  ‘पार्कर सोलर प्रोब’  नासा के अंतरिक्ष यान ‘पार्कर सोलर प्रोब’ ने सूर्य के अब तक के सबसे निकटतम बिंदु पर पहुंचकर इतिहास रच दिया है। एक छोटी कार के आकार का पार्कर क्रिसमस की पूर्व संध्या पर कोरोना (सूर्य का सबसे बाहरी आवरण) के प्रचंड ताप का सामना करते हुए सूरज की सतह से महज 61 लाख किमी की दूरी से गुजरा। पार्कर इतिहास का सबसे तेज रफ्तार से उड़ने वाला अंतरिक्ष यान है। जिस समय पार्कर सूरज के नजदीक से गुजर रहा था, तब इसकी रफ्तार 6.90 लाख किमी प्रति घंटा थी। ये रफ्तार इतनी ज्यादा है कि इससे टोक्यो से वाशिंगटन डीसी की यात्रा एक मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाए! पार्कर का मुख्य उद्देश्य सूर्य और पृथ्वी के बीच के संबंधों को समझना है। यह यान विशेष रूप से सूर्य के उन पहलुओं का अध्ययन कर रहा है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी वासियों के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। साथ ही, यह सूर्य पर निरंतर निगरानी रखकर इसके कई रहस्यों को सुलझाने में विज्ञानियों की मदद भी कर रहा है। मोटे तौर पर इस मिशन का लक्ष्य सूर्य के कोरोना का अवलोकन करना है, ताकि सूर्य के विभिन्न कारकों जैसे सौर तूफान, सूर...

बेटियां सौभाग्य से मिलती hain

 बेटियां सौभाग्य से मिलती हैं अपनी प्लेट में दो तरह की आइसक्रीम का मज़ा लेती सुनीता ने अपने देवर विनोद को कहा, "क्या देवर जी तीसरी बेटी होने पे कौन पार्टी देता है? अब तो दहेज़ के पैसे जुटाना शुरू कर दो।" अपनी भाभी के प्लेट को देख हँसते हुए विनोद ने कहा, अरे भाभी ! "आप क्यूँ चिंता करती है घर में ख़ुशी आयी थी तो सबके साथ बाँट लिया और फिर बेटियां तो अपना भाग्य ले कर आती है।" अपने देवर की बात सुन सुनीता मुस्कुरा के रह गई...जबकि असल में दिल खुशी से झूम रहा था देवर के घर तीसरी बेटी का जन्म जो हुआ था। खुद सुनीता के दो बेटे थे और इस बात का खूब घमंड रखती। दो तीन दिन में सारे मेहमान चले गए। अब घर पे थे तो विनोद रूचि और तीनों बेटियां मानवी, अंकिता और तीसरी बेटी जिसका नाम सबने प्रीति रखा। समय अपनी रफ़्तार से चल रहा था बच्चियों एक से बढ़ कर एक थी चाहे पढ़ाई हो या घर में माँ की मदद करना। घर की दीवारें बेटियों की बनायीं खूबसूरत पेंटिंग से सजती और अलमारियां उनके जीते मैडल और ट्रॉफी से, तीनों बेटियों की किलकारी और हँसी से विनोद और रूचि का घर गुलजार रहता। सुनीता कोई मौका नहीं छोड़ती रूचि को...
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 नाराज़ होने से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है किसी रिश्ते से निराश हो जाना ... नाराज़ होने में ही छुपा है कि नाराज़ होने वाले का, नाराज़ होने वाले से  अभी भी कुछ वास्ता है, निराश हो जाना रिश्ते से अलग होने का,  पहला क़दम, पहला रास्ता है, नाराज़गी देती है रास्ता रिश्तों को रफ़ू करने का,  निराशा करती है निर्णय रास्ता बदलने का 🖤 नाराज़गी, तेज़ आँच पर चढ़ा उफ़नता दूध है, जो पल भर में बर्तन से बाहर, मगर अगले ही पल मनुहार का पानी पाकर बर्तन की तली में होता है, मगर उबलते हुए या तली से मिलते हुए  जो अपना असल रूप नहीं खोता है रिश्ते की निराशा, धीमी आँच पर उबलता दूध है, जो आहिस्ता आहिस्ता, ख़ामोशी से  बर्तन के अंदर मचलता है, कई दफ़ा अपने मन की कहने को ढक्कन की तरफ़ भी चलता है, मगर उसकी जलन जब सुनी नहीं जाती और हारने लगती हैं कोशिशें उसकी,  तो ख़ुद को स्वाहा कर लेता है वो, बर्तन, चूल्हे, ढकने से निराश होकर ख़ुद का चेहरा बदल लेता है वो, और फिर कभी दूध के रूप में वापस नहीं लौटता।🖤 इसलिए नाराज़ होने से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है किसी रिश्ते से निराश हो जाना
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  एक अखबार वाला प्रात:काल लगभग 5 बजे जिस समय वह अख़बार देने आता था, उस समय मैं उसको अपने मकान की 'गैलरी' में टहलता हुआ मिल जाता था। अत: वह मेरे आवास के मुख्य द्वार के सामने चलती साइकिल से निकलते हुए मेरे आवास में अख़बार फेंकता और मुझको 'नमस्ते डॉक्टर साब' वाक्य से अभिवादन करता हुआ फर्राटे से आगे बढ़ जाता था।  क्रमश: समय बीतने के साथ मेरे सोकर उठने का समय बदल कर प्रात: 7:00 बजे हो गया। जब कई दिनों तक मैं उसको प्रात: नहीं दिखा तो एक रविवार को प्रात: लगभग 9:00 बजे वह मेरा कुशल-क्षेम लेने मेरे आवास पर आ गया। जब उसको ज्ञात हुआ कि घर में सब कुशल- मंगल है, मैं बस यूँ ही देर से उठने लगा था। वह बड़े सविनय भाव से हाथ जोड़ कर बोला,  "डॉक्टर साब! एक बात कहूँ?" मैंने कहा... "बोलो" वह बोला... "आप सुबह तड़के सोकर जगने की अपनी इतनी अच्छी आदत को क्यों बदल रहे हैं? आप के लिए ही मैं सुबह तड़के विधान सभा मार्ग से अख़बार उठा कर और फिर बहुत तेज़ी से साइकिल चला कर आप तक अपना पहला अख़बार देने आता हूँ...सोचता हूँ कि आप प्रतीक्षा कर रहे होंगे।" मैने विस्मय से पूछा.....

पूजा की कहानी 2

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पूजा की कहानी 2  व्याह को  कुछ ही समय हुआ था और आज कामवाली भी नहीं आई थी, इसलिए पूजा खुद ही बर्तन धोने में लग गई। जैसे ही वह बर्तन धो रही थी, अचानक उसके हाथ से कांच का कप फिसलकर धरती पर गिर गया और टूट गया। कप टूटते ही पूजा के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। उसे डर लगने लगी कि उसकी सास अब उसे जली-कटी सुनाएंगी। कप गिरने की आवाज सुनकर उसकी सास रामकली देवी तेजी से रसोई की ओर दौड़ी आईं। रामकली देवी ने रसोई में आते ही पूछा, "क्या हुआ पूजा बेटी?" पूजा ने घबराई हुई आवाज में जवाब दिया, "माँ, पता नहीं कैसे, ध्यान रखते हुए भी मेरे हाथ से कप गिरकर टूट गई।" रामकली देवी मुस्कुराईं और पूजा के पास आकर प्यार से बोलीं, "बेटी, चिंता मत करो। कप ही तो टूटा है, तुम्हें चोट तो नहीं आई ना? कप के टुकड़े तो फिर से जुड़ सकते हैं, लेकिन मेरी बहू के दिल के टुकड़े कभी नहीं जुड़ सकते। मेरे लिए तुम सबसे कीमती हो, न कि ये कप। और देखो, अभी तुम्हारे हाथों की मेंहदी भी नहीं उतरी है। अभी तुम और राज एक-दूसरे के साथ समय बिताओ और एक-दूसरे को समझो, ताकि तुम्हारे विवाह की नींव मजबूत हो। काजल, अपनी प...

पूजा की कहानी 1

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पूजा बैंक ऑफ इंडिया में उच्च पद पर कार्यरत थी।  शादी के बाद से वह अपने ससुराल में अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही थी। घर में बस तीन लोग थे—पूजा, उसके पति राहुल, जो खुद का व्यापार करते थे, और उनके वृद्ध ससुर, श्री आलोक तिवारी। पूजा की सास का देहांत एक साल पहले ही हो चुकी थी, और उसके बाद से ही घर का माहौल थोड़ा सा उदासीन हो गई थी। हर दिन, जब पूजा सुबह जल्दी उठकर घर के काम निपटाकर ऑफिस जाने के लिए तैयार होती, ठीक उसी समय उसके ससुर, जो अक्सर अपने कमरे में रहते थे, उसे बुलाते और कहते, "बहू, मेरा चश्मा साफ कर दो, और मुझे दे दो।" पूजा को ऑफिस के लिए देर हो रही होती थी, और वह मन ही मन झुंझलाती, लेकिन ससुर की बात का मान रखते हुए चश्मा साफ कर देती थी। यह सिलसिला रोज़ का हो गया था, और पूजा के लिए यह बात धीरे-धीरे असहनीय हो चली थी। एक दिन, जब यह रोज़ की बात उसके सहनशक्ति की सीमा को पार करने लगी, तो उसने यह बात अपने पति राहुल से साझा की। राहुल को भी यह सुनकर आश्चर्य हुआ, क्योंकि उनके पिता ने कभी ऐसी आदत नहीं दिखाई थी। राहुल ने पूजा को सलाह दी, "...

डीनो मोरिया और आफताब शिवदेसानी

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 डीनो मोरिया और आफताब शिवदेसानी भारतीय फिल्म उद्योग के दो प्रमुख अभिनेता हैं, जिन्होंने 2000 के दशक में अपनी भूमिकाओं से खासी लोकप्रियता हासिल की। डीनो मोरिया, एक मॉडल से अभिनेता बने, ने अपने करियर की शुरुआत 1999 में फिल्म प्यार में कभी कभी से की। उनका करिश्माई व्यक्तित्व और अभिनय कौशल उन्हें फिल्मों जैसे राज़ (2002) और गुनाह में अलग पहचान दिलाया। डीनो ने वेब सीरीज़ और प्रोडक्शन में भी कदम रखा, और फिटनेस के प्रति उनका झुकाव भी मशहूर है। आफताब शिवदेसानी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर बाल कलाकार फिल्म मिस्टर इंडिया (1987) से की। उन्होंने 1999 में मस्त से मुख्य अभिनेता के रूप में डेब्यू किया और अपनी रोमांटिक और कॉमेडी भूमिकाओं के लिए प्रसिद्ध हुए, जैसे आवारा पागल दीवाना और मस्ती। दोनों अभिनेताओं ने समय-समय पर अलग-अलग परियोजनाओं में काम करके अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

कीर्ति सुरेश कल्याणी प्रियदर्शन

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  कीर्ति सुरेश एक प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री हैं, जो मुख्यतः तमिल, तेलुगु और मलयालम सिनेमा में काम करती हैं। उनका जन्म 17 अक्टूबर 1992 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ। वे प्रसिद्ध मलयालम फिल्म निर्माता सुरेश कुमार और अभिनेत्री मेनका सुरेश की बेटी हैं। कीर्ति ने 2018 में तेलुगु फिल्म महानती में सावित्री की भूमिका निभाकर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। उनके अभिनय की सराहना उनकी स्वाभाविकता और बहुमुखी प्रतिभा के लिए की जाती है। कल्याणी प्रियदर्शन एक उभरती हुई भारतीय अभिनेत्री हैं, जो मुख्यतः मलयालम, तमिल और तेलुगु फिल्मों में सक्रिय हैं। उनका जन्म 5 अप्रैल 1993 को चेन्नई में हुआ। वे निर्देशक प्रियदर्शन और अभिनेत्री लिसी की बेटी हैं। कल्याणी ने 2017 में तेलुगु फिल्म हेलो से अभिनय की शुरुआत की, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। उनके अभिनय को उनकी सहज अभिव्यक्ति और सुंदरता के लिए सराहा जाता है।