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स्त्री का साथ

पुरुष को हमेशा एक स्त्री का साथ चाहिए    फिर वो चाहे मन्दिर हो या संसार  मंदिर में कृष्ण के साथ --> राधा                 राम के साथ --> सीता             शंकर के साथ --> पार्वती        सुबह से रात तक मनुष्य को             अपने हर काम में                एक स्त्री की           आवश्यकता होती ही है.        पढ़ते समय --> विद्या                 फिर --> लक्ष्मी        और अंत में -->  शाँति दिन की शुरुआत --> ऊषा के साथ,  दिन की समाप्ति --> संध्या से होती है.    किन्तु काम तो --> अन्नपूर्णा के                            लिये ही करना है.     रात यानी --> निशा के समय भी      ...

चरित्र पर कीचड़

  एक औरत सड़क पर एक आदमी के पास आई और विनम्रता से बोली: "माफ़ कीजिए जनाब, मैं एक छोटा सा सर्वे कर रही हूँ, क्या मैं आपसे कुछ सवाल कर सकती हूँ?"   आदमी: "जी बिल्कुल!"   औरत: "मान लीजिए आप बस में बैठे हैं, और एक महिला चढ़ती हैं लेकिन उन्हें सीट नहीं मिलती, क्या आप उन्हें अपनी सीट दे देंगे?"   आदमी: "नहीं।"   औरत ने अपने पेपर पर नज़र दौड़ाई और "बेअदब" के बॉक्स पर टिक लगा दिया। फिर अगला सवाल किया:   "अगर वह महिला गर्भवती हों तो क्या तब भी आप अपनी सीट नहीं छोड़ेंगे?"   आदमी: "नहीं।"   अबकी बार उसने "स्वार्थी" पर टिक लगा दिया और तीसरा सवाल किया: "और अगर वह महिला कमज़ोर या बुज़ुर्ग हों तो?"   आदमी: "नहीं।"   औरत (ग़ुस्से से): "तुम बेहद स्वार्थी और संवेदनहीन इंसान हो! तुम्हें महिलाओं, बुज़ुर्गों और कमज़ोर लोगों के तौर-तरीक़े नहीं  चरित्र पर कीचड़ सिखाए गए!"   यह कहकर वह तेज़ क़दमों से आगे बढ़ गई।   पास ही खड़ा दूसरा शख़्स, जो सारी बातचीत सुन रहा था, बोला: "यार, उसने तुम्हें इ...

वीर सावरकर कौन थे?

 *टीवी पत्रकार रुबिया लियाकत ने काँग्रेस समर्थक पत्रकार सतीश सिंह से पूछा कि वीर सावरकर कौन थे? तो सतीश सिंह ने कहा "हिन्दू महासभा के अध्यक्ष थे!"* *रुबिका: मतलब RSS के नहीं थे न?* *सतीश सिंह: अरे RSS वीर सावरकर की विचारधारा से प्रेरित संगठन है सावरकर ही एक तरह से RSS के संस्थापक थे!* *रुबिका: तो RSS के यही संस्थापक सावरकर 11 साल तक काला पानी की जेल में बंद थे और आपलोग कहते हैं कि RSS का एक आदमी आजादी के आंदोलन में जेल नहीं गया। अब मैं आपसे पूछती हूँ कि कांग्रेस के एक नेता का नाम बता दीजिए जिसे अंग्रेजों ने काला पानी की सजा दी हो!* *सतीश सिंह: अब्बा, डब्बा, चब्बा!* *रुबिका लियाकत: अंग्रेज, काला पानी की सजा उसे ही देते थे जिससे उनकी हुकूमत को खतरा होता था जाहिर है कि अंग्रेजों को ज़्यादा खतरा सावरकर से था, नेहरू से नहीं!* *सतीश सिंह: मेरे कहने का मतलब था!* *रुबिका लियाकत: मतलब-वतलब बाद में समझाइयेगा। अभी ये वादा कीजिये कि आगे से आप ये कहना बंद कर देंगे कि आरएसएस का कोई नेता जेल नहीं गया। आप ही ने कहा है कि सावरकर RSS के स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा पुंज हैं......!*

क्यों पढ़ें

 👨‍💻 “गुरुजी, मैंने बहुत सारी किताबें पढ़ी हैं... लेकिन ज़्यादातर मैं भूल गया हूँ। तो फिर पढ़ने का क्या मतलब है?” यह एक जिज्ञासु छात्र का अपने गुरु से सवाल था। गुरु ने कोई जवाब नहीं दिया। वह बस चुपचाप उन्हें देखते रहे। कुछ दिनों बाद, वे नदी के किनारे बैठे थे, अचानक, गुरुजी कहा: “मुझे प्यास लगी है। मेरे लिए थोड़ा पानी लाओ... लेकिन ज़मीन पर पड़ी उस पुरानी छलनी से पानी लाओ।” छात्र उलझन में लग रहा था। यह एक बेतुका अनुरोध था। कोई छेदों वाली छलनी में पानी कैसे ला सकता है? लेकिन उसने बहस करने की हिम्मत नहीं की। उसने छलनी उठाई और कोशिश की। एक बार। दो बार। बार-बार... उसने अलग-अलग कोण पर छलनी को घुमाया, यहाँ तक कि अपनी उंगलियों से छेदों को ढकने की भी कोशिश की। कुछ भी काम नहीं आया। वह एक बूँद भी नहीं रोक सका। थका हुआ और निराश होकर, उसने छलनी शिक्षक के पैरों पर गिरा दी और कहा: “मुझे माफ़ करना। मैं फेल हो गया। यह नामुमकिन था।” शिक्षक ने उसे प्यार से देखा और कहा: “तुम फेल नहीं हुए। छलनी तो देखो।” छात्र ने नीचे देखा... और कुछ देखा। पुरानी, काली, गंदी छलनी अब साफ़ चमक रही थी। पानी, हालाँकि पानी ...