चरित्र पर कीचड़

 एक औरत सड़क पर एक आदमी के पास आई और विनम्रता से बोली: "माफ़ कीजिए जनाब, मैं एक छोटा सा सर्वे कर रही हूँ, क्या मैं आपसे कुछ सवाल कर सकती हूँ?"  
आदमी: "जी बिल्कुल!"  
औरत: "मान लीजिए आप बस में बैठे हैं, और एक महिला चढ़ती हैं लेकिन उन्हें सीट नहीं मिलती, क्या आप उन्हें अपनी सीट दे देंगे?"  
आदमी: "नहीं।"  
औरत ने अपने पेपर पर नज़र दौड़ाई और "बेअदब" के बॉक्स पर टिक लगा दिया। फिर अगला सवाल किया:  
"अगर वह महिला गर्भवती हों तो क्या तब भी आप अपनी सीट नहीं छोड़ेंगे?"  
आदमी: "नहीं।"  
अबकी बार उसने "स्वार्थी" पर टिक लगा दिया और तीसरा सवाल किया: "और अगर वह महिला कमज़ोर या बुज़ुर्ग हों तो?"  
आदमी: "नहीं।"  


औरत (ग़ुस्से से): "तुम बेहद स्वार्थी और संवेदनहीन इंसान हो! तुम्हें महिलाओं, बुज़ुर्गों और कमज़ोर लोगों के तौर-तरीक़े नहीं चरित्र पर कीचड़ सिखाए गए!"  
यह कहकर वह तेज़ क़दमों से आगे बढ़ गई।  
पास ही खड़ा दूसरा शख़्स, जो सारी बातचीत सुन रहा था, बोला: "यार, उसने तुम्हें इतनी बातें सुनाईं, तुमने जवाब क्यों नहीं दिया?"  
आदमी मुस्कुरा कर बोला: "अगर वह मुझसे वजह पूछती तो मैं बता देता कि मैं बस ड्राइवर हूँ!" 😅😅  
हमारे समाज का सबसे बड़ा दुख यही है कि हम आधी जानकारी की बुनियाद पर दूसरों के चरित्र का फ़ैसला कर लेते हैं। 😢

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