पूजा की कहानी 2

पूजा की कहानी 2 

व्याह को  कुछ ही समय हुआ था और आज कामवाली भी नहीं आई थी, इसलिए पूजा खुद ही बर्तन धोने में लग गई। जैसे ही वह बर्तन धो रही थी, अचानक उसके हाथ से कांच का कप फिसलकर धरती पर गिर गया और टूट गया। कप टूटते ही पूजा के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। उसे डर लगने लगी कि उसकी सास अब उसे जली-कटी सुनाएंगी। कप गिरने की आवाज सुनकर उसकी सास रामकली देवी तेजी से रसोई की ओर दौड़ी आईं।
रामकली देवी ने रसोई में आते ही पूछा, "क्या हुआ पूजा बेटी?"
पूजा ने घबराई हुई आवाज में जवाब दिया, "माँ, पता नहीं कैसे, ध्यान रखते हुए भी मेरे हाथ से कप गिरकर टूट गई।"
रामकली देवी मुस्कुराईं और पूजा के पास आकर प्यार से बोलीं, "बेटी, चिंता मत करो। कप ही तो टूटा है, तुम्हें चोट तो नहीं आई ना? कप के टुकड़े तो फिर से जुड़ सकते हैं, लेकिन मेरी बहू के दिल के टुकड़े कभी नहीं जुड़ सकते। मेरे लिए तुम सबसे कीमती हो, न कि ये कप। और देखो, अभी तुम्हारे हाथों की मेंहदी भी नहीं उतरी है। अभी तुम और राज एक-दूसरे के साथ समय बिताओ और एक-दूसरे को समझो, ताकि तुम्हारे विवाह की नींव मजबूत हो। काजल, अपनी पूजा भाभी का ख्याल रखना, अभी वह इस घर में नई है। पूजा बेटी, तुम मुझे अपनी माँ समझना। मुझे तुम्हारा दिल जीतना है, सास बनकर नहीं, बल्कि माँ बनकर।"
रामकली देवी के ये शब्द पूजा के लिए अमृत के घूँट जैसे थे। उसकी आँखों में आंसू छलक आए और वह रामकली देवी के पैरों में गिरकर बोली, "माँ, मैंने एक माँ छोड़ी थी, लेकिन यहां आकर मुझे दूसरी माँ मिल गई। बल्कि, आप तो मेरी माँ से भी ज्यादा ममता से भरी हुई हैं। अगर मेरे मायके में कप टूट जाती, तो माँ भी बिना कुछ कहे नहीं रहतीं।"
रात को पूजा को नींद नहीं आ रही थी। वह बार-बार शाम की घटना को याद कर रही थी और अपने अतीत में खो गई। उसे याद आया कि जब उसके इकलौते भाई राजा की शादी हुई थी, तब उसकी माँ पूनम देवी ने उसकी भाभी नेहा पर घर के काम की पूरी ज़िम्मेदारी डाल दी थी। माँ ने भाभी को एडजस्ट होने का समय नहीं दिया था। राजा और नेहा को कहीं बाहर जाने का मन होता, तो माँ का मुँह फूल जाता। कभी भी भाभी को खुलकर हँसते हुए नहीं देखा। समय के साथ भाभी ने सहन करना छोड़ दिया और घर में रोज़ झगड़े होने लगे।
एक दिन, नेहा के हाथ से कांच का गिलास गिरकर टूट गया था। पूनम देवी ने गुस्से में आकर भाभी को डांटा था, "इतना कीमती गिलास फोड़ दिया, रोज़ इतना खाती हो, फिर भी ध्यान नहीं रखती?" नेहा ने भी पलटकर गुस्से में जवाब दिया था, "हां, मैं ही खाती हूँ, आप तो हमेशा खड़ी खड़ी हुक्म चलाती हैं। जब से आई हूँ, आपने मुझे कभी चैन से रहने नहीं दिया। हर रोज़ जली कटी सुनाने के सिवा आपको कोई और काम नहीं है।"
पूजा को अब समझ में आ रहा था कि उसकी माँ ने भाभी के साथ जैसा व्यवहार किया था, उसकी वजह से ही शायद राजा और नेहा आज अलग घर में रह रहे थे। लेकिन आज की घटना ने उसकी सोच बदल दी थी। उसे लगा कि हर सास और बहू के रिश्ते में ऐसा नहीं होता है।
नींद न आने की वजह से पूजा ने सोचा कि माँ से बात कर लेती हूँ। उसने फोन उठाया और देर रात अपनी माँ को कॉल किया। फोन उठाते ही पूनम देवी ने पूछा, "पूजा, सब ठीक तो है ना? कहीं राज या सास-ननद से झगड़ा तो नहीं हो गया?"
पूजा ने हंसते हुए कहा, "नहीं माँ, ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन आज कुछ ऐसा हुआ जिससे मेरा दिल भर आया।" और फिर उसने अपनी माँ को सारी घटना बताई, कि कैसे उसकी सास रामकली देवी ने उसे प्यार से संभाला था और कप टूटने पर भी कोई गुस्सा नहीं किया था।
माँ ने चुपचाप सब सुना और फिर धीरे से बोली, "बेटा, मैं सोच भी नहीं सकती थी कि ऐसा भी हो सकता है।"
पूजा ने गहरी सांस लेकर कहा, "माँ, काश आपने भी भाभी के साथ ऐसा ही व्यवहार किया होता, तो शायद आज भइया-भाभी अलग घर में नहीं रहते। मेरी सासू माँ ने मुझे समझाया कि सास-बहू का रिश्ता प्यार और समझदारी से बनता है। उन्होंने शुरू से ही अपने प्रेम से नींव मजबूत कर ली है, इसलिए हमारे परिवार में मज़बूती कैसे नहीं आएगी?"
आज पूनम देवी को महसूस हो रहा था कि उनकी बेटी पूजा अब उनकी माँ बनकर उन्हें एक अच्छी सीख दे रही है।
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    आपका अपना Bhavsingh Thapa 



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