*सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग, जगदलपुर का विश्व आदिवासी मूलनिवासी दिवस के पूर्व संध्या समाज के नाम संदेश* 🌿 *9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर संदेश* 🌿 बस्तर के मूलनिवासी एवं आदिवासी समाज के नाम जोहार बस्तर! सेवा जोहार! जोहार आदिवासी समाज! बस्तर की धरती केवल मिट्टी का भू-भाग नहीं है। यह हमारे पूर्वजों की स्मृतियों, संघर्षों, संस्कृति, परंपराओं, भाषा, प्रकृति और सामुदायिक जीवन की जीवंत पहचान है। 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस हमारे लिए केवल बधाई और उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, अस्मिता, अधिकार और भविष्य पर विचार करने का ऐतिहासिक अवसर है। आज आवश्यकता है कि हम स्वयं से सवाल करें— क्या हम अपने अधिकारों को जानते हैं? क्या हमारी ग्रामसभाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं? क्या हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को समझ रही है? और क्या हम अपने जल, जंगल, जमीन तथा सामुदायिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट हैं? संविधान ने हमें केवल अधिकार नहीं दिए, जिम्मेदारी भी दी है। बस्तर के अनुसूचित क्षेत्रों में पाँचवीं अनुसूची, पेसा कानून और ग्रामसभा की संवैधानिक ...
जय जोहार संगवारी हो
जवाब देंहटाएंजय जोहार
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