इथेनॉल
इथेनॉल कई लोग कह रहे हैं कि गन्ने से इथेनॉल बन रहा है इसलिए चीनी महंगी हो रही है. वास्तव में इन लोगों को यह भी नहीं पता है कि चीनी कैसे बनती है और इथेनॉल कैसे बनता है. इनको यह भी नहीं पता की अगर आज इथेनॉल नहीं बिक रहा होता तो चीनी सौ में भी नहीं मिलती. वास्तविकता यह है कि गन्ने से मुख्य रूप से चीनी बनाइ जाती है. चीनी बनाने के बाद गन्ने का बेगास (खोई) निकलती है, यह बायलर में जलाने के काम आती है इसके अलावा इससे पेपर और पार्टिकल बोर्ड (एक तरह का प्लाई वूड जिससे स्पीकर बॉक्स बनते हैं) बनाया जाता है लगभग दस किलोग्राम गन्ने से एक किलोग्राम चीनी बनती है. बाकी सब बेगास, शीरा और मैली बन जाता है. मैली से जैविक खाद बनाई जाती है. शीरे से जो इथेनॉल बनता है उससे पहले केवल शराब और स्पिरिट (इथेनॉल में कॉपर सल्फेट का मिश्रण) बनती थी. शराब और स्परिट की खपत बहुत कम है इसलिए पहले बड़े बड़े खड्डों में शीरा डाल दिया जाता था या फिर नालों में वह दिया जाता था. जबसे इथेनॉल को पेट्रोल में मिक्स किया जाने लगा है, तब से शीरे को फेंकना बंद हो गया है और इससे शुगर मिल को अतिरिक्त आमदनी होती है....