*एक विनम्र प्रार्थना*

 प्रिय मित्रों, 

*एक विनम्र प्रार्थना*

ईश्वर की असीम कृपा है कि आज हम एक सुरक्षित सोसाइटी में रहते हैं। हमारे घरों में पर्याप्त राशन है, स्टोर से सामान भी आ रहा है, और सच कहें तो शायद हममें से किसी को कल की भूख का कोई डर भी नहीं है।
लेकिन ज़रा एक पल के लिए अपनी बालकनी से बाहर झाँककर या अपनी भरी हुई थाली से नज़रें हटाकर सोचिए
क्या हमारे आस-पास की दुनिया में हर घर की कहानी यही है?
इसीलिए, अपने इस बड़े परिवार (सोसाइटी) के सभी सदस्यों से मेरी एक हृदयस्पर्शी गुज़ारिश है
*👉 सादगी अपनाएं:* अगर आपकी थाली में रोज़ 2 सब्ज़ियाँ सजती हैं, तो कृपया कुछ दिन 1 से ही संतोष कर लें।
*👉 संसाधन बचाएं:* जितनी ज़रूरत हो बस उतना ही पकाएं।
*👉 अन्न का सम्मान करें:* भूल से कुछ बच भी जाए, तो उसे प्रसाद समझकर अगले पहर ग्रहण कर लें, कूड़ेदान में अन्न का एक दाना भी न जाने दें।
हमारी जेबें और साधन शायद हमें महीनों का राशन जमा करने की अनुमति दे दें, लेकिन बाज़ार में संसाधन सीमित हैं। हमारी 'अतिरिक्त चाहत' या 'होर्डिंग (जमाखोरी)' किसी और की 'आखिरी उम्मीद' को छीन सकती है।
एक और महत्वपूर्ण बात
आज हमारे देश का शीर्ष नेतृत्व अत्यंत मजबूत और पूर्णतः विश्वसनीय है। हम सुरक्षित हाथों में हैं। इसलिए कृपया किसी भी प्रकार की 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) न करें। अपनी गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल भी उतना ही डलवाएं, जितना आप सामान्य दिनों में लेते रहे हैं। देश में इन संसाधनों की कोई कमी नहीं है। अफवाह फैलाने वालों की बातों में बिल्कुल न आएं और बेवजह की घबराहट न पालें।
यह समय केवल समझदारी दिखाने का नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक संवेदनशीलता और धैर्य का भी है। आइए, अपनी सोसाइटी की तरफ से एक मिसाल कायम करें। अपने लिए नहीं... उन अनदेखे लोगों के लिए भी सोचिए, जो शायद आज भी एक वक्त की रोटी की आस में हैं।
सीमित खरीदें... संयमित रहें... अफवाहों से बचें... और अन्न के हर दाने का वंदन करें🙏
*यही असली इंसानियत और राष्ट्रधर्म की परीक्षा है*
उम्मीद है, हम सब मिलकर इसमें उत्तीर्ण होंगे।
आपका शुभचिंतक
हम और आप.. 🙏🏼💐

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

स्त्री का साथ

सहजीविता

🌿 *9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर संदेश* 🌿