नक्सलमुक्त बस्तर में अब जुए का खेल!

 नक्सलमुक्त बस्तर में अब जुए का खेल! बस्तर में खुलेगा प्रदेश का पहला मिनी कैसीनो, आदिवासियों को विकास चाहिए या जुए की लत?
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नक्सलवाद से मुक्ति का सपना बस्तर ने इसलिए देखा था कि यहां के बच्चों को शिक्षा मिले, युवाओं को रोजगार मिले, आदिवासियों के जीवन में खुशहाली आए और विकास की नई इबारत लिखी जाए। लेकिन अब बीजापुर से सामने आ रही मिनी कैसीनो की खबर ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है क्या नक्सलमुक्त बस्तर में अब जुए का कारोबार पैर पसारने जा रहा है?
बताया जा रहा है कि बीजापुर जिले के अंतिम छोर पर तिमेड के पास मिनी कैसीनो के लिए निर्माण कार्य किया जा रहा है। दावा है कि यहां लाखों-करोड़ों रुपये के दांव लगाए जा सकेंगे। बस्तर के इतिहास में यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला है कि जिस इलाके ने दशकों तक हिंसा, भय और पिछड़ेपन का दंश झेला, वहां अब जुए के अड्डे जैसी व्यवस्था खड़ी करने की तैयारी क्यों हो रही है?
मामले की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक विक्रम सिंह मंडावी मौके पर पहुंचे। उनके मुताबिक, उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं थी। मौके पर निर्माण कार्य जारी मिला और पूछताछ में मिनी कैसीनो खोले जाने की बात सामने आई। बताया जा रहा है कि इस कारोबार से जुड़े लोग दूसरे प्रदेश से हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस निर्माण की अनुमति किसने दी? कैसीनो चलाने का लाइसेंस किस विभाग ने जारी किया? क्या इसके लिए विधिवत मंजूरी ली गई है? अगर अनुमति मिली है, तो किस नियम के तहत? और अगर अनुमति नहीं है, तो निर्माण किसके संरक्षण में हो रहा है?
विधायक विक्रम सिंह मंडावी ने भी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अब सरकार और प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि तिमेड के पास आखिर चल क्या रहा है और इसकी वैधानिक स्थिति क्या है।
बस्तर के आदिवासी समाज ने नक्सलवाद के कारण अपनों को खोया, हिंसा झेली और विकास के लिए लंबा इंतजार किया। ऐसे में यह आशंका स्वाभाविक है कि कहीं जुए और सट्टे जैसे कारोबार स्थानीय लोगों को आर्थिक संकट और लत की ओर न धकेल दें।
नक्सलमुक्त बस्तर का मतलब क्या अब जुए के कारोबार के लिए नए रास्ते खोलना है?
बस्तर को स्कूल चाहिए, अस्पताल चाहिए, रोजगार चाहिए, उद्योग चाहिए और युवाओं को बेहतर भविष्य चाहिए। अगर यहां मिनी कैसीनो खोलने की तैयारी हो रही है, तो सरकार को बताना होगा कि इससे स्थानीय जनता को क्या लाभ होगा और सामाजिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है, न कि ऐसे कारोबार को लेकर सवालों के घेरे में छोड़ देना। सरकार जवाब दे—यह विकास का मॉडल है या आदिवासी अंचल के भविष्य के साथ एक खतरनाक प्रयोग?
        
              सुधी पाठक

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