संदेश

*पुरखों की विरासत बनाम बाहरी हस्तक्षेप*

 *पुरखों की विरासत बनाम बाहरी हस्तक्षेप*  हमारी संस्कृति, बोली-भाषा, परब-पंडुम, पहनावा एवं रूढ़ि-नेंग ही हमारी वास्तविक पहचान हैं। कोया जब गर्भ में होता है, तभी से उसे प्रकृति की रक्षा और प्राकृतिक शिक्षा का ज्ञान मिलने लगता है। आज बुजुर्गों से दूरी के कारण युवा अवश्य भटक रहे हैं, किंतु उनकी अस्मिता उनके अनादिकालीन परंपरा और संस्कृति में ही निहित है। हमारे पूर्वजों ने जल-जंगल-जमीन की रक्षा तथा अपनी संस्कृति में बाह्य हस्तक्षेप के विरुद्ध संघर्ष किया है, जिसके ऐतिहासिक प्रमाण आज भी उपलब्ध हैं; जैसे — संथाल विद्रोह (1855-56), मुंडा उलगुलान (1899-1900), हल्बा डोंगर आंदोलन (1774-1779), कोया विद्रोह, भील और कोल आंदोलन। यदि इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि को खंगाला जाए, तो स्पष्ट होगा कि हमारे पूर्वज सदैव बाहरी हस्तक्षेप के विरोध में खड़े रहे। हमारे पुरखों को भली-भांति ज्ञात था कि हमारी संस्कृति, परब-पंडुम एवं नेंग-जोग में हस्तक्षेप कर हमें अपने जाल में फँसाने का प्रयास किया जाएगा। उन्हें यह भी स्पष्ट था कि हमारी परंपराओं को अपने ग्रंथों के समान बताकर मितव्यवहार के माध्यम से हमारे निकट आया...

ST SC। पर धर्म परिवर्तन का असर

 यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है, जिसे स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है। आपकी इमेज में जो दावा किया गया है, वह पूरी तरह सही नहीं है क्योंकि यह अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के बीच के एक बड़े कानूनी अंतर को नजरअंदाज करता है। भारतीय कानून के अनुसार स्थिति इस प्रकार है: 1. अनुसूचित जाति (SC) के लिए नियम अनुसूचित जाति के मामले में यह पोस्ट आंशिक रूप से सही है। संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार, केवल वही व्यक्ति SC का दर्जा प्राप्त कर सकता है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानता हो। यदि कोई SC सदस्य ईसाई या इस्लाम धर्म अपनाता है, तो वह अपना SC दर्जा और उससे मिलने वाला आरक्षण खो देता है। सुप्रीम कोर्ट में अभी भी इस पर विचार चल रहा है कि क्या दलित ईसाइयों और मुस्लिमों को भी SC का दर्जा मिलना चाहिए, लेकिन फिलहाल कानून वही है जो ऊपर बताया गया है। 2. अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए नियम (आपका मुख्य क्षेत्र) इमेज में किया गया दावा अनुसूचित जनजाति (ST) पर लागू नहीं होता। यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। ST का दर्जा धर्म पर आधारित नहीं है, बल्कि यह 'जातीय पहचान' और ...

**पेनकड़ा के आवश्यक दिशा~निर्देश /चेतावनी**

 **पेनकड़ा के आवश्यक दिशा~निर्देश /चेतावनी** —""लिंगो पेनकड़ा वल्लेकनार्र में आपका हार्दिक स्वागत/सेवा~जोहार"":—🙏🙏🙏 बुमकाल कृपया ध्यान रहे......! १-जूता-चप्पल,बेल्ट,फुलपैंट,पायजामा वर्जित है।आप धोती-लुहंगी पहनकर ही पेनकड़ा/जतरा के निर्धारित परिधि में प्रवेश कर सकते हैं। २-कैमरा -मोबाईल से फोटोग्राफी-वीडियो ग्राफी प्रतिबंधित है। कार्यालय दस्तावेजीकरण के रुप में केवल अधिकृत व्यक्ति ही करेंगे। ३- पेन बानाओं में अगरबत्ती/सिंदुर/चुनरी चढ़ाना भी प्रतिबंधित है। कृपया प्रतिबंधित सामाग्रियों को लेकर न जायें।अगरबत्ती के स्थान पर धूप/नीबू/लाली का ही उपयोग करेंगे। ४-किसी भी पेन बानाओं को छूना सक्त मना है । कृपया निर्धारित दूरी से ही पेनों का दर्शन करेंगे। ५-यू-ट्युबरों,रील्स बनाने वालों को भी निर्देश है कि  समिति द्वारा अधिकृत व्यक्ति के बिना लिंगो पेन से संबंधित आडियो- विडियो क्लिप्स शेयर नहीं करेंगे और न ही जप लिंगो पेन या पेन बानाओं के संबंध में कोई भी सगाजन उल्टी-सीधी जानकारी नहीं देंगे। ६-पेनकड़ा ""नो पाॅलिथीन जोन""  घोषित है।डिस्पोजल गिलास,डिस्पोजल प्ल...

*लिंगो संग बानी बिरादरी*

 *लिंगो संग बानी बिरादरी*  चलो जतरा चैत पुन्नी के,   लिंगो जी ने बुलाया है। अठारह बाजा, अठारह डाका,   बानी बिरादरी से सजाया है। प्राचीन जीवन-दर्शन की नींव रख,   अस्तित्व की राह दिखाया है। गुरु की पदवी पर विराजे जो,   आराध्य पेनों को मार्ग बताया है। वल्लेकनार्र, अंतागढ़ से नेवता,   बानी बिरादरी को बुलाया है। चलो जतरा चैत पुन्नी के,   लिंगो जी ने बुलाया है। एक बानी करे माटी सेवा,   एक भाई जल भर लाया है। मउर फूलों से सजा बजार,   कलार भाई मंद लाया है। एक चाक में बने दिया-करसा,   कोष्ठा ने पालो भिजवाया है। बज उठे घुँघरू और तुर्रा,   तेली भाई तेल लाया है। चलो जतरा चैत पुन्नी के,   लिंगो जी ने बुलाया है। एक बानी घर के मुर्रा लाई,   पारधी ने चाउर पिसाया है। सोना-चाँदी के सजे आभूषण,   एक भाई प्रहरी को औजार दिलाया है। साज सजे मंडा चारों ओर,   मूर्र ने जीवा में बसाया है। गाड़ा के बाजा डम-डम बाजे,   लिंगो ने कोया बुम जगाया है। चलो जतरा चैत पुन्नी के,   लिंगो जी ने बुलाया है।  ✍️धर्मपाल कोड़ापे

*पेंशन*

  *पेंशन*                        *जब बालों में चांदी जैसी चमक आने लगे,* *घुटनों में कट-कट का मधुर संगीत गूँजने लगे,* *और बिना चश्मे के दुनिया 4K में न दिखे—* *तब नौकरीपेशा की महबूबा कहती है—* *“अब आप सेवानिवृत्त हो रहे हैं,* *लेकिन मैं आपकी ऐसी नायिका हूँ…* *जो आपको कभी नहीं छोड़ूंगी…”* *उस नायिका का नाम है—* *पैंशन!* *वाह, वाह…* *ये है ऐसी वफादार प्रेमिका,* *जो हर महीने आती है और कहती है—* *“डार्लिंग, मैं आ गई हूँ,* *अब मैं पूरे महीने तुम्हारे साथ रहूँगी!”* *ये नखरे नहीं करती, कभी डेट मिस नहीं करती,* *कभी ब्रेकअप नहीं करती,* *कभी मूड खराब नहीं करती।* *ये है ऐसी सरल, सुंदर और संस्कारी नायिका,* *इसे देखकर दिल कहता है—* *“मैं तुमसे प्यार करता रहूँगा… जीवन भर!”* *जवानी में नौकरी* *पहली नज़र के प्यार जैसी होती है,* *लेकिन पैंशन* *जीवन भर के हनीमून जैसी होती है* *मीठा, शांत, स्थिर और सहारा देने वाला।* *और जब शाम को* *हम चाय और नाश्ते के साथ बैठते हैं,* *तब पैंशन महबूबा* *आपका हाथ थामकर कहती हैं—* *“डरो मत, हीरो…* *मैं यहाँ हूँ,...

आदिवासी संस्कृति का संरक्षण

 *🙏सच कड़वा लगता है, लेकिन सच को स्वीकार करना ही समझदारी है। यह बात हम सब पर लागू होती है। 🙏* *👉 हमारे समाज के लिए जो निर्णय अदालत से आया है, वह हमें आईना दिखाने वाला है। यदि कोई आदिवासी होकर भी अपने समाज की रीति-रिवाज और परंपराओं को छोड़कर हिन्दू परंपराओं के अनुसार जीवन जीता है, तो उस पर उसी कानून की प्रक्रिया लागू होगी। इसमें अदालत से ज्यादा कहीं न कहीं हम पढ़े-लिखे लोग ही जिम्मेदार हैं, क्योंकि बदलाव का बीज हमने ही बोया है।* *👉यदि हम चाहते हैं कि हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारी परंपराएं सुरक्षित रहें, तो केवल बातें करने से नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में जीने से बचाया जा सकता है।* *👉 अगर परंपरा बचानी है, तो विवाह संस्कार में शुरू से लेकर अंत तक शामिल होना होगा। आजकल हम केवल दावत के दिन पहुंचते हैं, जो हमारी परंपरा के साथ न्याय नहीं है।* *👉 अगर परंपरा बचानी है, तो जन्म संस्कार में भी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। केवल औपचारिकता निभाने से परंपराएं जीवित नहीं रहतीं।* *👉 अगर परंपरा बचानी है, तो मृत्यु संस्कार में भी पूरी संवेदना और जिम्मेदारी के साथ शामिल होना होगा। यह भ...

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस

  अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस आज है नारियों का दिवस, हर्ष, उमंग के साथ है मानना। उनके हक और अधिकार में, समानता का है भाव लाना। सृष्टि के सभी नारी शक्ति को, सर्वोच्च न्याय अधिकार है देना। शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय नीति में, समर्पण का भाव है देना।  जग के भविष्य को लेकर, चिंता मुक्त है बनाना। उच्च नीच का भाव त्याग कर, उनके हक अधिकार दिलाना।               ।। उपरोक्त स्वरचित काव्य लेख समस्त नारियों के चरणों में समर्पित है, जय हिन्द💐🙏🙏🙏

Ayurvedic Water Therapy

 Ayurvedic Water Therapy - सिर्फ सही पानी पीकर भी तीनों दोष संतुलित किए जा सकते हैं - इस पोस्ट में हम एक बेहद आसान लेकिन अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले विषय पर बात करेंगे — पानी।  आयुर्वेद के अनुसार सही तरीके से पानी पीना अपने-आप में एक चिकित्सा है।  अगर पानी को शरीर की प्रकृति और बीमारी के अनुसार लिया जाए, तो यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करने में मदद कर सकता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा पानी पीना ही हेल्दी है, लेकिन आयुर्वेद कहता है कि सही तापमान, सही समय और सही मात्रा में लिया गया पानी ही शरीर के लिए औषधि बनता है। अब समझते हैं कि गर्म पानी और सामान्य तापमान वाले पानी का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है और किस स्थिति में कौन सा पानी बेहतर रहता है। गर्म पानी के सेवन के प्रमुख लाभ आयुर्वेदिक ग्रंथों में उष्ण जल यानी गर्म पानी को पाचन और शोधन के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया है। पाचन शक्ति को मजबूत करता है गर्म पानी जठराग्नि को सक्रिय करता है। जिन लोगों को भूख कम लगती है, खाना भारी लगता है या भोजन ठीक से नहीं पचता, उनके लिए गर्म पानी बहुत लाभकारी माना जाता है। यह...

पीढ़ी कहां जा रही है एक विचार

👉🏻 *बच्चों की शादी 20 वर्ष की उम्र में तो एक शताब्दी में 5 पीढ़ी* 👉🏻 *बच्चों की शादी 25 वर्ष की उम्र में तो एक शताब्दी में 4 पीढ़ी* 👉🏻 *बच्चों की शादी 33 वर्ष की उम्र में तो एक शताब्दी में 3 पीढ़ी*  साधारण गणना से पता चलता है कि हिन्दू जनसंख्या वृद्धि दर कहां जा रही है? विचारणीय तथ्य। *❗क्या हमारा समाज अगली सदी तक रहेगा ही नहीं?*  — हिन्दू समाज के आत्ममंथन का समय आ गया है — आज चारों ओर एक अजीब-सा अंधकार फैल गया है। 🏚️ गाँव सूने, मोहल्ले खाली, और घरों में चुप्पी है। *बेटियाँ 30–35 की उम्र तक कुंवारी।* *बेटे 35 पार कर चुके, पर विवाह नहीं।* शादी होती है तो बहुत देर से… बच्चे होते हैं तो एक ही… *और फिर तलाक़… टूटे हुए परिवार…* *माता-पिता अकेले…..और पूरी पीढ़ी खोखली।* *क्या इसे “शिक्षित समाज” कहा जाए या “आत्मघाती समाज”?*  *⚠️ जनसंख्या घटने की चुपचाप चलती साजिश*  मान लीजिए 100 लोग हैं = 50 जोड़े। अगर हर जोड़ा केवल एक संतान पैदा करता है — तो अगली पीढ़ी में बस 45-46 बचते हैं। फिर वही क्रम चला, तो तीसरी पीढ़ी में समाज लगभग शून्य। यह कोई डराने की बात नहीं — यह गणित है, ...

चेंदरू मंडावी की सच्ची कहानी

  चेंदरू मंडावी की सच्ची कहानी छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के एक छोटे-से गाँव में जन्मे चेंदरू मंडावी एक साधारण आदिवासी परिवार से थे। उनका जीवन संघर्षों से भरा था। उनके माता-पिता मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। गरीबी, जंगलों की दुर्गमता और संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई करना उनके लिए बहुत कठिन था। कई बार उन्हें स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। चेंदरू बचपन से ही पढ़ने का शौक रखते थे। वे दिन में खेतों में काम करते और रात में मिट्टी के दीये की रोशनी में पढ़ाई करते थे। गाँव में शिक्षा को ज़्यादा महत्व नहीं दिया जाता था, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। समाज और परिस्थितियों ने उन्हें कई बार रोकने की कोशिश की, लेकिन उनके भीतर कुछ कर दिखाने की जिद थी। धीरे-धीरे चेंदरू ने शिक्षा के महत्व को अपने गाँव के बच्चों को भी समझाया। उन्होंने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया और स्वयं उदाहरण बनकर दिखाया। आगे चलकर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और सफलता हासिल की। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि कठिन हालात भी मजबूत इरादों के आगे हार मान लेते हैं। आज चेंदरू मंडावी...

*1 जनवरी,1948 #खरसावां के शहीदों को सादर नमन ।*

1 जनवरी,1948 खरसावां के शहीदों को सादर नमन 💞🙏                       उन्मुक्त देसज वीर शहीद, अब पंछी बन ऊँची उड़ान भरते हैं, वक्त का फेर देखिये, मुख्य अपराधी षड्यंत्रकारी की खोखली ऊँची मूरत मस्तक पर पंछी रोज भर-भरकर बीट करते हैं, ऊंची मूरत और कसीदे भी दशकों बाद उसके अपराधों को ढक नहीं पाये.... उस अपराधी को आमनागरिक याद नहीं करते, आम जनमानस में वो कहीं नहीं ही है लेकिन हम सदा जीवंत हैं, आज भी अपने जीवनदर्शन, रहन सहन, समृद्ध परंपराओं में लोगों के दिलों में हैं, साथ हैं, लोग हमारे बीच हैं, हम लोगों के बीच हैं, कहीं उनके आश्चर्य का विषय हैं, ज्ञान, सीख, अनुपालन का विषय हैं, लोगों के दिलों गहरे स्नेही भावपूर्ण हैं । लेकिन लाख प्रचार के बावजूद वो मुख्य अपराधी, षड्यंत्रकारी आज देश लोक हृदय में दूर तक नहीं है।             वक्त कभी थमता नहीं, चिंतन के साथ आगे बढ़ते जाना है, विश्व के 193 मान्यता प्राप्त देशों और 8 गैर मान्यता प्राप्त देशों का अंतर्राष्ट्रीय मानक नववर्ष के एक और पायदान 2026में आप-हम सभी सपरिव...

पति के साथ रिश्ते को मजबूत बनाने के तरीके

 पति के साथ रिश्ते को मजबूत बनाने के तरीके पति के साथ रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं: 1. संचार: अपने पति के साथ खुलकर बात करें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। एक दूसरे की बात सुनना और समझना रिश्ते को मजबूत बनाने में मदद करता है। 2. विश्वास: विश्वास रिश्ते की नींव है। एक दूसरे पर विश्वास करना और उसे बनाए रखना महत्वपूर्ण है। 3. समय बिताना: अपने पति के साथ गुणवत्ता पूर्ण समय बिताएं। इससे आपके रिश्ते में मजबूती आएगी और आप एक दूसरे के करीब आएंगे। 4. समर्थन: अपने पति का समर्थन करें और उनकी सफलताओं पर गर्व करें। इससे उन्हें लगता है कि आप उनकी परवाह करती हैं। 5. माफ करना: हर किसी से गलती होती है। माफ करना और आगे बढ़ना रिश्ते को मजबूत बनाने में मदद करता है। 6. रोमांस: अपने रिश्ते में रोमांस बनाए रखें। छोटी-छोटी चीजें जैसे कि सरप्राइज गिफ्ट या डेट नाइट आपके रिश्ते को ताजगी दे सकती हैं। 7. साझा लक्ष्य: जीवन के लक्ष्यों को एक साथ तय करें और उन्हें प्राप्त करने के लिए काम करें। इससे आपके रिश्ते में एकता और मजबूती आएगी। इन तरीकों को अपनाकर आप अपने पति के साथ अपने ...

सहजीविता

 सहजीविता  -------------- तुम जंगल यूँ पचा नहीं सकते गमले तुम्हें बचा नहीं सकते, जीना है तो कृतज्ञ रहो प्रकृति को यूँ नचा नहीं सकते। गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... ये नदी-समंदर,पर्वत-झरने मिटे कहीं गर, लगोगे मरने  प्रकृति के इस साहचर्य को समझो  खुद से ब्याह रचा नहीं सकते।  गमले तुम्हें बचा नहीं सकते...  ये अपनी हठधर्मी छोड़ो  ये खुदग़र्ज़ी बेशर्मी छोड़ो  टूट जाओगे एक दिन मानव  खुद को गर लचा नहीं सकते। गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... लूट रहें जो पर्वत-झरने  अपनी झोली को बस भरने  अरे टूटें उनके शीश महल! क्या इतना शोर मचा नहीं सकते? गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... अपनी हद में रहना सीखो जंगल से मत लड़ना सीखो  ये खूँटे के भैंस नहीं  शेर हैं इन्हें परचा नहीं सकते। गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... गर मैं टूटा तुम भी टूटोगे  गर मैं उजड़ा तुम भी उजड़ोगे। जितनी साँसें तुमको दी हैं  उससे अधिक खरचा नहीं सकते। गमले तुम्हें बचा नहीं सकते... *#अरावलीबचाओ* ✊🏾🌱 *#हसदेवबचाओ*

घर में माता-पिता के साथ संबंध कैसे बनाए रखें?

घर में माता-पिता के साथ संबंध कैसे बनाए रखें? घर में माता-पिता के साथ संबंध बनाए रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं: 1. सम्मान और आदर: माता-पिता का सम्मान और आदर करना सबसे महत्वपूर्ण है। उनकी बात सुनना और उनकी भावनाओं का ध्यान रखना आवश्यक है। 2. समय देना: माता-पिता के साथ समय बिताना बहुत जरूरी है। उनके साथ बातचीत करना, उनकी पसंद का खाना खाना, और उनके साथ समय बिताने से आपके रिश्ते मजबूत होते हैं। 3. मदद करना: घर के कामों में मदद करना और माता-पिता की जरूरतों को पूरा करना भी महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें लगता है कि आप उनकी परवाह करते हैं। 4. धैर्य और समझदारी: माता-पिता के साथ कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं। ऐसे में धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। उनकी बात सुनने की कोशिश करें और शांति से समस्या का समाधान निकालें। 5. प्रेम और स्नेह: माता-पिता को प्यार और स्नेह दिखाना भी जरूरी है। उन्हें गले लगाना, धन्यवाद देना, और उनके लिए अच्छा महसूस कराना आपके रिश्ते को और मजबूत बनाएगा। इन बातों का पालन करके, आप अपने माता-पिता के साथ एक मजबूत और प्रेमपूर्ण रिश्ता बना सकते हैं।

कर्मचारियों के परिवार कल्याण निधि (Family Welfare Fund) और समूह बीमा (Group Insurance) की पिछली कटौतियों (deductions) की जानकारी देखने के लिए

 कर्मचारियों के परिवार कल्याण निधि (Family Welfare Fund) और समूह बीमा (Group Insurance) की पिछली कटौतियों (deductions) की जानकारी देखने के लिए, आपको पे-स्लिप (Pay Slip), वेतन पर्ची (Salary Slip), जीपीएफ (GPF) या संबंधित बीमा पोर्टल (Insurance Portal) पर लॉग-इन करना होगा, या अपने HR विभाग/लेखा विभाग (Accounts Dept.) से संपर्क करना होगा, क्योंकि यह जानकारी वेतन विवरण और बीमा कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होती है.  जानकारी देखने के मुख्य तरीके: पे-स्लिप/वेतन पर्ची (Pay Slip/Salary Slip): आपकी हर महीने की वेतन पर्ची में परिवार कल्याण निधि (Family Welfare Fund) और समूह बीमा (Group Insurance) की कटौतियों का विवरण होता है. पुरानी पे-स्लिप्स को अपने रिकॉर्ड में देखें या HR/लेखा विभाग से डिजिटल/प्रिंटेड कॉपी मांगें. GPF/SIPF पोर्टल (राज्य कर्मचारियों के लिए): यदि आप राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, तो SIPF (State Insurance & Provident Fund) पोर्टल पर लॉग-इन करके अपने बीमा और अन्य कटौतियों का विवरण देख सकते हैं. sipf.rajasthan.gov.in जैसे पोर्टल पर लॉग-इन करके आप अपनी जानकारी प्राप्त कर सकत...

स्त्री का साथ

पुरुष को हमेशा एक स्त्री का साथ चाहिए    फिर वो चाहे मन्दिर हो या संसार  मंदिर में कृष्ण के साथ --> राधा                 राम के साथ --> सीता             शंकर के साथ --> पार्वती        सुबह से रात तक मनुष्य को             अपने हर काम में                एक स्त्री की           आवश्यकता होती ही है.        पढ़ते समय --> विद्या                 फिर --> लक्ष्मी        और अंत में -->  शाँति दिन की शुरुआत --> ऊषा के साथ,  दिन की समाप्ति --> संध्या से होती है.    किन्तु काम तो --> अन्नपूर्णा के                            लिये ही करना है.     रात यानी --> निशा के समय भी      ...

चरित्र पर कीचड़

  एक औरत सड़क पर एक आदमी के पास आई और विनम्रता से बोली: "माफ़ कीजिए जनाब, मैं एक छोटा सा सर्वे कर रही हूँ, क्या मैं आपसे कुछ सवाल कर सकती हूँ?"   आदमी: "जी बिल्कुल!"   औरत: "मान लीजिए आप बस में बैठे हैं, और एक महिला चढ़ती हैं लेकिन उन्हें सीट नहीं मिलती, क्या आप उन्हें अपनी सीट दे देंगे?"   आदमी: "नहीं।"   औरत ने अपने पेपर पर नज़र दौड़ाई और "बेअदब" के बॉक्स पर टिक लगा दिया। फिर अगला सवाल किया:   "अगर वह महिला गर्भवती हों तो क्या तब भी आप अपनी सीट नहीं छोड़ेंगे?"   आदमी: "नहीं।"   अबकी बार उसने "स्वार्थी" पर टिक लगा दिया और तीसरा सवाल किया: "और अगर वह महिला कमज़ोर या बुज़ुर्ग हों तो?"   आदमी: "नहीं।"   औरत (ग़ुस्से से): "तुम बेहद स्वार्थी और संवेदनहीन इंसान हो! तुम्हें महिलाओं, बुज़ुर्गों और कमज़ोर लोगों के तौर-तरीक़े नहीं  चरित्र पर कीचड़ सिखाए गए!"   यह कहकर वह तेज़ क़दमों से आगे बढ़ गई।   पास ही खड़ा दूसरा शख़्स, जो सारी बातचीत सुन रहा था, बोला: "यार, उसने तुम्हें इ...

वीर सावरकर कौन थे?

 *टीवी पत्रकार रुबिया लियाकत ने काँग्रेस समर्थक पत्रकार सतीश सिंह से पूछा कि वीर सावरकर कौन थे? तो सतीश सिंह ने कहा "हिन्दू महासभा के अध्यक्ष थे!"* *रुबिका: मतलब RSS के नहीं थे न?* *सतीश सिंह: अरे RSS वीर सावरकर की विचारधारा से प्रेरित संगठन है सावरकर ही एक तरह से RSS के संस्थापक थे!* *रुबिका: तो RSS के यही संस्थापक सावरकर 11 साल तक काला पानी की जेल में बंद थे और आपलोग कहते हैं कि RSS का एक आदमी आजादी के आंदोलन में जेल नहीं गया। अब मैं आपसे पूछती हूँ कि कांग्रेस के एक नेता का नाम बता दीजिए जिसे अंग्रेजों ने काला पानी की सजा दी हो!* *सतीश सिंह: अब्बा, डब्बा, चब्बा!* *रुबिका लियाकत: अंग्रेज, काला पानी की सजा उसे ही देते थे जिससे उनकी हुकूमत को खतरा होता था जाहिर है कि अंग्रेजों को ज़्यादा खतरा सावरकर से था, नेहरू से नहीं!* *सतीश सिंह: मेरे कहने का मतलब था!* *रुबिका लियाकत: मतलब-वतलब बाद में समझाइयेगा। अभी ये वादा कीजिये कि आगे से आप ये कहना बंद कर देंगे कि आरएसएस का कोई नेता जेल नहीं गया। आप ही ने कहा है कि सावरकर RSS के स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा पुंज हैं......!*

क्यों पढ़ें

 👨‍💻 “गुरुजी, मैंने बहुत सारी किताबें पढ़ी हैं... लेकिन ज़्यादातर मैं भूल गया हूँ। तो फिर पढ़ने का क्या मतलब है?” यह एक जिज्ञासु छात्र का अपने गुरु से सवाल था। गुरु ने कोई जवाब नहीं दिया। वह बस चुपचाप उन्हें देखते रहे। कुछ दिनों बाद, वे नदी के किनारे बैठे थे, अचानक, गुरुजी कहा: “मुझे प्यास लगी है। मेरे लिए थोड़ा पानी लाओ... लेकिन ज़मीन पर पड़ी उस पुरानी छलनी से पानी लाओ।” छात्र उलझन में लग रहा था। यह एक बेतुका अनुरोध था। कोई छेदों वाली छलनी में पानी कैसे ला सकता है? लेकिन उसने बहस करने की हिम्मत नहीं की। उसने छलनी उठाई और कोशिश की। एक बार। दो बार। बार-बार... उसने अलग-अलग कोण पर छलनी को घुमाया, यहाँ तक कि अपनी उंगलियों से छेदों को ढकने की भी कोशिश की। कुछ भी काम नहीं आया। वह एक बूँद भी नहीं रोक सका। थका हुआ और निराश होकर, उसने छलनी शिक्षक के पैरों पर गिरा दी और कहा: “मुझे माफ़ करना। मैं फेल हो गया। यह नामुमकिन था।” शिक्षक ने उसे प्यार से देखा और कहा: “तुम फेल नहीं हुए। छलनी तो देखो।” छात्र ने नीचे देखा... और कुछ देखा। पुरानी, काली, गंदी छलनी अब साफ़ चमक रही थी। पानी, हालाँकि पानी ...

*सुदामा को ग़रीबी क्यों मिली?*

 🌹🐚🌹🐚🌹🐚🌹🐚🌹🐚🌹🐚           *सुदामा को ग़रीबी क्यों मिली?* आज तक आपको ये जानकारी नही होगी कि सुदामा जी गरीब थे तो क्यों? अगर अध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाय तो सुदामा जी बहुत धनवान थे। जितना धन उनके पास था किसी के पास नही था। लेकिन अगर भौतिक दृष्टि से देखा जाये तो सुदामाजी बहुत निर्धन थे। आखिर क्यों............. एक ब्राह्मणी थी जो बहुत गरीब निर्धन थी। भिक्षा माँग कर जीवन यापन करती थी। एक समय ऐसा आया कि पाँच दिन तक उसे भिक्षा नही मिली वह प्रतिदिन पानी पीकर भगवान का नाम लेकर सो जाती थी। छठवें दिन उसे भिक्षा में दो मुट्ठी चने मिले, कुटिया पर पहुँचते-पहुँचते रात हो गयी। ब्राह्मणी ने सोचा अब ये चने रात में नहीं खाऊँगी, प्रात:काल वासुदेव को भोग लगाकर तब खाऊँगी । यह सोंचकर ब्राह्मणी चनों को कपडे में बाँधकर रख दिया। और वासुदेव का नाम जपते-जपते सो गयी...! देखिये समय का खेल. ...कहते हैं........ पुरुष बली नहीं होत है! समय होत बलवान!! ब्राह्मणी के सोने के बाद कुछ चोर चोरी करने के लिए उसकी कुटिया में आ गये... इधर उधर बहुत ढूँढा चोरों को वह चने की बँधी पोटली मिल...